Narak Chaturdashi

  • Date: Wednesday, 18 October 2017
  • Event: Narak Chaturdashi

 

विक्रम सम्वत् 2074    कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी                                   18th October 2017

नरक चतुर्दशी

कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष पर पड़ने वाली चतुर्दशी पर नरक चौदस का त्यौहार मनाया जाता है। इसे छोटी दीपावली भी कहते है। दीपावली की तरह ही इस दिन भी दीप प्रज्वलित किया जाता हैं। इस दिन सूर्योदय से पहले उठकर तेल उबटन से मालिश करके चिचड़ी की पत्तियां जल में डालकर स्नान करने का विधान है। ऐसा करने से नरक से मुक्ति मिलती है। स्नान के पश्चात विष्णु मंदिर और कृष्ण मंदिर में भगवान की आराधना अत्यन्त पुण्यदायक मानी गई है। इससे पाप कटता है और सौन्दर्य की प्राप्ति होती है।

 

नरक चौदस के दिन संध्या के समय स्त्रान कर घर के कुल देवता की पूजा की जाती है। तथा घर के देवताओं और पुरखों की भी पूजा का विधान है। उन्हें नवैद्य चढ़ाते हैं और उनके सामने दीप जलाते हैं। ऎसा माना जाता है कि नरक चौदस को पूजा के दौरान घर—परिवार से नरक अर्थात् दु:ख—विपदाओं को बाहर किया जाता है। घर के आंगन, बरामदे और द्वार को रंगोली से सजाया जाता है।।

 

इस दिन को दीपावली की तरह मनायें जाने के संदर्भ में पौराणिक मान्यता है कि - प्रागज्योतिषपुर में नरकासुर नामक राजा राज्य करता था। एक युद्ध के दौरान उसने देवराज इन्द्र को पराजित कर देवताओं और संतो की 16 हजार पुत्रियों को बन्दी बना लिया।

 

माता अदीति देवलोक की माता व भगवान कृष्ण की पत्नी सत्यभामा की समधि थी। जब सत्यभामा को को इस घटना के बारे में पता चला तो वो क्रोधित हो भगवान कृष्ण से नरकासुर का वध की अनुमति मांगी। नरकासुर को स्त्री के हाथों मृत्यु का श्राप मिला था। इसलिए श्रीकृष्ण ने सत्यभामा को नरकासुर के वध का अवसर दिया। सत्यभामा ने सारथी कृष्ण की सहायता से नरकासुर का वध करके सभी देवियों और संतो को नरकासुर की कैद से मुक्त करवाया। उन देवियों का खोया हुआ सम्मान लौटाने के लिए भगवान कृष्ण ने उन्हें पत्नी के रुप में स्वीकार किया। अगले दिन सुबह कृष्ण के शरीर से दानवराज नरकासुर के रक्त की दुर्गन्ध दूर करने के लिए उनकी पत्नियों ने उन्हें सुगन्धित जल से स्नान करवाया। लोकमान्यता है की तभी से इस दिन तेल उबटन से मालिश करके चिचड़ी की पत्तियां जल में डालकर स्नान करने की परम्परा का सुरुआत हुई। इस दिन विधि-विधान से पूजा करने वाले व्यक्ति को मनोवांछित फ़ल की प्राप्ति होती हैं।

 

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