मैं कौन हूँ व कहा से आया हूँ 
आइये जरा गंभीरता से विचार करे 
  मैं कौन व कहाँ  से आया हूँ और कहा जाना है ?
मैं पवित्र आत्मा चौरासी लाख योनिओं में भटकते -भटकते अपने पुण्य कर्मो के उदय होने पर इस दुर्लभ मनुष्य योनी में आया और मुझे मोक्ष जाना हैं/

  मनुष्य योनी में ही क्या होता हैं ?
सिर्फ इसी योनी से ही जीव मोक्ष पा सकता हैं,यहाँ तक की देवताओ को भी मोक्ष पाने के लिए मनुष्य योनी में  आकर पुण्य कर्म करने पड़ते हैं,तब ही वो मोक्ष पा सकते हैं  /    

क्या मनुष्य सिर्फ पूजा- पाठ  आराधना एवं परोपकार के कार्य करके मोक्ष पा सकता हैं ?
 "नहीं" इन सबसे धन - दौलत,वैभव यहाँ तक की देव पद भी पाया जा सकता हैं,परन्तु मोक्ष पद नहीं /

   हमें मोक्ष मार्ग में जाने के लिए क्या करना होगा ?
 राग -द्वेष को तजकर,मन -वचन और काया से हर समय सिर्फ अपने को देखकर चिंतन करना  और जो कमिया अपने में नजर आये उन्हें दूर करना ही सबसे सरल उपाए हैं,लेकिन यह बिना गुरु के संभव नहीं हैं /