SHRI DHARACHARYA JI

आपका जन्म त्रिवेणी संगम के पूतपवन से अभिषिक्त श्री चित्रकूट धाम की निकटता से धन्यीकृत दक्षिण शरीरा ग्राम से श्रावण कृष्ण द्वितीया सं. 2031 ( 7-7-74) को श्री गौतम गोत्र समुद्र से शरद्पूर्ण चन्द्र के समान हुआ. आप अपने पवित्र जन्म के द्वारा पं. श्रीरामसूर्य मिश्र एवं श्री मती यशोदा देवी को पिता एवं माता का पद देकर उनके पितृत्व एवं मातृत्व को अतिशय गौरवान्वित किया. यथासमय यथाविधि उपनयनादि संस्कारों से संस्कृत होकर आप प्रारम्भिक शिक्षा को पूर्ण कर माध्यमिक शिक्षा के लिए अग्रसर हुए, परन्तु आधुनिक विज्ञान प्रधान शिक्षा, शल्य क्रिया (चीरफ़ाड़) आदि प्रधान होने के कारण आपका अन्तर्मानस अत्यन्त खिन्न हो उठा, और आप हरिद्वार आदि पवित्र तीर्थों में शास्त्रतत्वज्ञ एवं पारदृश्वा विद्वानों के सन्निधि में, शास्त्रों का अभ्यास करते हुए शिक्षा के अगले सोपान की शुरुआत वृन्दावन की भक्तिभूमि से किया. वृन्दावन के ऋषिकल्प सकलशास्त्र तत्वावगाही पं. श्रीराजवंशी द्विवेदी जी से नव्य एवं प्राचीन व्याकरण तथा सदाचार की साक्षात् चेतन मूर्ति स्वरुप श्रीमद् भागवत महापुराण के अनुपमेय विद्वान पं. श्री कन्हैयालाल शास्त्री जी से श्रीमद् भागवत एवं आल्वार स्वरुप वृन्दावनीय श्रीरंग मंदिर के अध्यक्ष स्वामी श्री गोवर्धन रंगाचार्य जी महाराज (बालक स्वामीजी) के श्री चरण सान्निधय में साम्प्रदायिक रहस्य वेदान्तादि का अध्ययन किया. सकलशास्त्र पारावारीण तार्किकतल्लज पं. रत्तनम् के. एस. वरदाचार्यजी के तपः पूत प्रबोधालोक में श्रीभाष्यादि विविध दर्शन ग्रन्थों का अध्ययन किया.
11 वर्ष की आयु में सम्पूर्ण गीता कण्ठस्थ होने पर आपको गीता शिरोमणी की उपाधी से अलंकृत किया गया. आपकी साधुता, सच्चरित्रता, विद्वता से प्रसन्न होकर परम पूज्य वै. वा. ज. गु. रा. स्वामी श्री माधवाचार्य जी महाराज ने अशर्फ़ी भवन अयोध्या पीठ का अपना युवराज मनोनीत किये, संस्कृत वाक्य स्पर्धा में देश में प्रथम स्थान प्राप्त कर दो स्वर्ण पदकों से अलंकृत हुए. '' पाण्डवगीता '' का हिन्दी अनुवाद तथा नित्य अराधना विधि पुस्तकों का लेखन भी आपने किया. 21 अगस्त 2007 को अशर्फ़ी भवन अयोध्या में देश के प्राधान साधु, संत, महंत धर्मायार्यो ने आपको जगद् गुरुरामानुजाचार्य इस महान पद से अलंकृत किया. वर्तमान में आप लगभग 10 संस्थाओं के अध्यक्ष एवं संचालक हैं. श्रीरंग मंदिर वृन्दावन के आप ट्रस्टी भी है. आदिवासी क्षेत्र में वस्त्र, अन्न, ज्ञान दानकर भारतीय संस्कृति की रक्षा भी कर रहें हैं. देश भर में गीता भागवत, रमायण गोदा उत्सव के 400 से भी अधिक सफ़ल कार्यक्रमों के द्वारा हजारों लोगों का मार्ग दर्शन आपने किया. आपकी साधुता, सच्चरित्रता, विद्वान, विनम्रता, उदारता आदि से प्रसन्न हो कर हजारों लोगों ने आपको अपना सद् गुरु मानकर भगवत्शरणागति दीक्षा प्राप्त कर अपनें जीवन को धन्य बना लिया हैं.


