SRI ANAND KRISHAN SHASTRI JI MAHARAJ

परम पूज्य श्री पं. आनन्द कृष्ण शास्त्री जी महाराज
मनुष्य का कर्तव्य ईश्वर प्राप्ति है। जो ईश्वरीय आज्ञायाओं के पालन अर्थात वेदानुकूल आचरण तथा धर्म के दस लक्षणों पर चलने और अधर्म त्याग से हो सकता है। हमारे देश भारत की पवित्र पावन भूमि पर अनेक संतो, महात्माओं, वीर पुरुषों, समाज सुधारकों व बलिदानियों ने जन्म लिया है। जिन्होने अपने कार्यो एवं वाणी से हिन्दु धर्म व देश का नाम भी ऊँचा किया है। ऐसे ही एक महान कृष्णभक्त सरल एवं ओजस्वी वाणी के भागवत एवं रामकथा प्रवक्ता परम पूज्य श्री पं. आनन्द कृष्ण शास्त्री जी महाराज का जन्म ब्रजमण्डल के शयनवा गाँव में हुआ। जहाँ पर श्रीकृष्ण ने अनेक ऐश्वर्यमयी लीलायें की। ऐसी पुण्यमयी भूमि में पूज्य श्री आनन्दकृष्ण जी का जन्म दिनांक 25.11.1982 को हुआ। आपके पितामह कुलभूषण स्वर्गीय पं. श्री जगमोहन पथसारिया एक महान कृष्णभक्त थे। उनका आदर प्रत्येक प्राणी के मन में स्वभाविक रुप से था। पूज्य श्री शास्त्री जी के पिता पं. श्री दामोदर प्रसाद पथसारिया एवं माता श्रीमती राधादेवी जी यथा नाम तथा गुण अत्यन्त धार्मिक, सद्ग्रहस्थ एवं समाजसेवी हैं। श्री माता - पिता ने महाराज श्री को बाल्यावस्था में ही भागवत कथा का अध्ययन कराने के लिए श्रीधाम वृन्दावन के श्री धर्मसंघ संस्कृत विद्यालय में परम पूज्य गो लोक वासी श्री राज वंशी जी द्विवेदी जो कि श्रीमद् भागवत के प्रकाण्ड विद्वान थे। आपश्री ने उनकी सान्निध्यता में भागवत जी का अध्ययन किया। इस दौरान शास्त्रीय संगीत का भी गहन अध्ययन किया।
महाराजश्री के दीक्षागुरु अनन्त श्री विभूशित जगद् गुरु निम्बार्कपीठ श्री श्री 1008 श्री राधासर्वेश्वर शरण देवाचार्य जी (श्री श्री महाराज) हैं।
श्री आनन्द कृष्ण शास्त्री जी 20 वर्ष की आयु में निपुण प्रवक्ता के रुप में प्रतिष्ठित हुए। आपकी कथा शैली इतनी सरस एवं सरल है कि सभी श्रेणी के श्रोता भरपूर आनन्नद लेते हैं। हिन्दी संस्कृति से ओत-प्रोत महाराजश्री भागवत एवं रामकथा से सम्बन्धित किसी शंका का समाधान बड़ी सरलता से करने में समर्थ है।
परमपूज्य श्री आनन्दकृष्ण जी शास्त्री जी की सम्मत मान्यता है कि इस युग में श्रीमद् भागवत ही कृष्ण चरणों को प्राप्त कराने में सक्ष्म है। महाराज श्री ने विदेशों में भी सनातन धर्म प्रचार - प्रसार किया किया है और करते रहेंगे ।


