
GURU STUTI
श्री गुरुस्तुतिःअखण्ड - मण्डलाकारं व्याप्तं येन चराचरम्.
तत्पदं दर्शितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः
अखण्डानन्दबोधाय शिष्य-सन्तापहारिणे
सच्चिदानन्दरुपाय तस्मै श्रीगुरवे नमः
अज्ञान-तिमिरान्धस्य ज्ञानांजन-शलाकया
चक्षुरुन्मीलितं येन तस्मै श्रीगुरवे नमः
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः
गुरुः साक्षात परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः
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