Posted by:Kumar200
; Published on 2012-05-11 03:46:02 ; Views 44
‘मोह’ मुह वैचित्ये,धातु से बना है. मन क़ि वह अवस्था , जिसमे मनुष्य "वि-चित" हो जाय, अपने चित में , विवेक में न रहे, यही मोह की अवस्था कहलाती है.
योग दर्शन के अनुसार मोह - में पांच क्लेश है - अविद्या, अस्मिता, राग-द्वेष, अभिनिवेशा: पांच क्लेशा.
सबसे बड़ा क्लेश, सब क्लेशो की जड़ है – अविद्या.
अविद्या-अस्मिता से उत्पन्न होती है. अस्मिता-अर्थात्- "मै" नहीं हूँ, उसे ही मै समझ ....
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