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Posted by: Keshav Published on   2012-05-12 11:28:46 Views ,  127
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जब हम में "मैं" पन जाग जाता है। मैं और मेरे विचार, मेरी सोच ही हर जगह सही है, बाकी सब गौण या मूल्यहीन....
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Posted by:Keshav ; Published on   2012-05-12 06:16:57 ; Views   102
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ऋषि आरुणि का बेटा श्वेत केतु गुरुकुल से पढ़कर लौटा तो पिता को लगा कि बेटे में कुछ घमण्ड़ आ गया है. उन्होंने कहा- बेटा तुम समझते हो कि सब जान गये हो, पर यह तो बताओं कि तुमने वह विद्या पढ़ी है जिसे पढ़कर सब कुछ पढ़ लिया जाता है?
'सो तो मैं नही जानता पिताजी! आप मुझे बताइये न'
आरुणि बोले - 'बेटा, तुमने मिट्टी देखी है न? मिट्टी के लोंदे से तरह-तरह बर्तन बनते हैं. घड़ा, मटका, सुर....
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Posted by:Kumar200 ; Published on   2012-05-11 03:46:02 ; Views   44
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‘मोह’ मुह वैचित्ये,धातु से बना है. मन क़ि वह अवस्था , जिसमे मनुष्य "वि-चित" हो जाय, अपने चित में , विवेक में न रहे, यही मोह की अवस्था कहलाती है.
योग दर्शन के अनुसार मोह - में पांच क्लेश है - अविद्या, अस्मिता, राग-द्वेष, अभिनिवेशा: पांच क्लेशा.
सबसे बड़ा क्लेश, सब क्लेशो की जड़ है – अविद्या.
अविद्या-अस्मिता से उत्पन्न होती है. अस्मिता-अर्थात्- "मै" नहीं हूँ, उसे ही मै समझ ....
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Posted by:Tniranjan ; Published on   2012-05-10 04:17:04 ; Views   91
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कहते हैं कि शुकदेव जी 12 वर्ष तक माँ के ही गर्भ में रहकर वेद और शास्त्रों का श्रवण और मनन करते रहे. माँ को पीड़ा होते देख उनके पिता व्यास जी ने उनसे पूछा- ''तुम कौन हो?''
शुकदेव बोले - ''चौरासी लाख योनियों मे भटक चुकने के बाद क्या बताऊं, मैं कौन हूँ?''
व्यास- ''तुम बाहर क्यों नही आते?''
शुकदेव- ''संसार में भटकते-भटकते मुझे वैराग्य हो गया है पर मैं जानता हूँ कि गर्भ से बाहर नि....
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Posted by:Kumar200 ; Published on   2012-05-09 04:06:24 ; Views   101
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‘‘ॐ’’ तीन तत्वों से युक्त उच्चारित शब्द में काफी शक्ति है। यह शब्द इतना शक्तिशाली है की अगर निरंतर मन और तन से इसे उच्चारित किया जाय तो तन और मस्तिक के कई असहनीय और बेचैन करने वाली क्रियाओं को दूर किया जा सकता है।
योग बल , शरीर को शौष्ठव बनाने में सफल है। अगर हम योग बल पर ही आधारित रहे तो शरीर के ९०% अंगो में स्फूर्ति बनी रहेगी। यहाँ तक की ऋषिगण योग बल के आधार पर ही ....
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Posted by:Neerus ; Published on   2012-05-09 12:45:56 ; Views   80
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एक दिन प्रातः काल श्री साई बाबा मुँह हाथ धोने के पश्चात चक्की पीसने की तैयारी करने लगे. उन्होंने फ़र्श पर एक टाट का टुकड़ा बिछा, उस पर हाथ से पीसने वाली चक्की रखी. उन्होंने कुछ गेँहू ड़ालकर पीसना आरम्भ कर दिया.
वहाँ उपस्थित लोग सोचने लगे कि बाबा के चक्की पीसने से क्या लाभ है? उनके पास तो कोई है भी नही और वे अपना निर्वाह भी भिक्षावृत्ति द्वारा ही करते हैं. बाबा के चक्....
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Posted by:Neerus ; Published on   2012-05-08 12:55:57 ; Views   93
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भगवान शनिदेव का पूजन करते समय इस मंत्र को पढ़ते हुए उन्हें चन्दन लेपना चाहिए.
भो शनिदेवः चन्दनं दिव्यं गन्धादय सुमनोहरम् |
विलेपन छायात्मजः चन्दनं प्रति गृहयन्ताम् ||

भगवान श्रीशनिदेव को अर्घ्य समर्पित करते समय इस मंत्र का उच्चारण करें.
ॐ शनिदेव नमस्तेस्तु गृहाण करूणा कर |
अर्घ्यं च फ़लं सन्युक्तं गन्धमाल्याक्षतै युतम् ||

इस मंत्र का उच्चारण क....
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