साई बाबा का बगीचा
Posted by:
neerus
2012-02-09 02:57:11
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तरुण अवस्था में श्री साई बाबा ने अपने केश कभी नही कटाये और वे सदैव एक पहलवान की तरह रहते थे. जब वे रहाता जाते (जो की शिरड़ी से 3 मील दूर है) तो वह वहाँ से गेंदा, जाई और जूही के पौधे मोल ले जाया करते थे. वे उन्हें स्वच्छ करके उत्तम भूमि देखकर लगा देते थे और स्वयं सींचते थे. वामन तात्या नाम के एक भक्त इन्हें नित्य प्रति दो मिट्टी के घड़े दिया करते थे. इन घड़ों द्वारा बाबा स्वयं ही पौधों में पानी ड़ाला करते थे. वे स्वयं कुएँ से पानी खींचते और संध्या समय घड़ों को नीम वृक्ष के नीचे रख देते थे. जैसे ही घड़े वहाँ रखते, वैसे ही फ़ूट जाया करते थे क्योंकि वे बिना तपाये और कच्ची मिट्टी के बने रहते थे. दूसरे दिन तात्या उन्हें फ़िर दो घड़े दे दिया करते थे. यह क्रम तीन वर्षों तक चला और श्रीसाई बाबा के कठोर परिश्रम तथा प्रयत्न से वहाँ फ़ूलों की एक सुन्दर फ़ुलवारी बन गई. आजकल इसी स्थान पर बाबा के समाधि-मंदिर की भव्य इमारत शोभामान है, जहाँ सहस्त्रों भक्त आते-जाते रहते हैं.
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