शिवलिंग भगवान शंकर का ऐसा मंगलयमय रुप है जिसके अभिषेक से मनुष्यों के करोड़ो जन्मों के पाप नष्ट हो जाते हैं. पुराणों में शिवलिंग पर अलग- अलग जलधाराओं व फ़ूलों से शिव पूजन का अलग - अलग महत्व बताया गया है. शास्त्रों के अनुसार इन धाराओं को अर्पित करते समय शिव मन्त्रों जैसे- महामृत्युंजय मंत्र, शिव गायत्री मंत्र, रुद्र मंत्र, षडाक्षरी मंत्र व शिव सहस्त्रनामों का उच्चारण करते रहना चाहिए. इस तरह अभिषेक करने से सभी मनोरथों की पूर्ति व संकटों से मुक्ति मिलती है.
- भगवान शंकर को गंगाजल की धारा बहुत प्रिय है. इसलिए उन्हे गंगाधर भी कहा जाता है. गंगाजल द्वारा अभिषेक करने से भोग और मोक्ष दोनों की ही प्राप्ति होती है.
- मन की शान्ति के लिए शिवलिंग पर जल धारा से अभिषेक करें.
- भौतिक सुख-साधनों की प्राप्ति के लिए सुगन्धित तेल की धारा से शिवलिंग का अभिषेक करें.
- शिवलिंग पर गन्ने के रस की धार चढायी जाये तो भी सम्पूर्ण आनन्द की प्राप्ति होती है.
- अच्छे स्वास्थ्य के लिए व रोग मुक्त होने के लिए शहद की धारा से भगवान शिव का अभिषेक करें.
- संतान प्राप्ति व वंश वृद्धि के लिए शिव सहस्त्रनामों का उच्चारण करते हुए घी की धारा अर्पित करें.
- धन सम्पदा की प्राप्ति के लिए कमल, बिल्व पत्र, शतपत्र और शंखपुष्प से भगवान शिव का पूजन करें.
- यदि अल्पायु का भय हो तो उसे एक लाख दुर्वाओं के द्वारा भगवान शिव का पूजन करना चाहिए.
- पुत्र की कामना हेतु लाल डंठल वाले एक लाख धतूरे के फ़ूलों से पूजा करनी चाहिए.
- मान प्रतिष्ठा यश की प्राप्ति हेतु एक लाख अगस्त्य के फ़ूलों से पूजन करना चाहिए.
- वाहन सुख के लिए चमेली पुष्प से भगवान शिव की पूजा करें.
- जूही के फ़ूलों से भगवान शंकर का पूजन करने से अन्न की कभी कमी नही आती.
- करनेर के फ़ूलों द्वारा पूजन करने से सुन्दर वस्त्रों की प्राप्ति होती है.
- सुख-सम्पत्ति की प्राप्ति के लिए सिंगार के फ़ूलों से पूजन करना चाहिए.
शिवरात्रि व श्रवण मास में इन जलधाराओं व पूजन का विशेष शुभफ़ल प्राप्त होता है. इससे न केवल शिव की कृपा होती है बल्कि भक्तों पर माता गौरी, गणेश व माता लक्ष्मी की भी कृपा प्राप्ति होती है.
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