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News >>राशियों के अनुसार करें शिव आराधना
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राशियों के अनुसार करें शिव आराधना
 
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2011-03-01 07:28:13
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महाशिवरात्रि का पर्व बुधवार को मनाया जा रहा है. वैसे तो प्रत्येक मास के कृष्णपक्ष की चतुर्थी शिवरात्रि कहलाती है, लेकिन फ़ाल्गुन कृष्ण चतुर्थी महाशिवरात्रि कही गई है, क्योकि इसीदिन अर्धरात्रि के समय भगवान शिव लिंग रुप में प्रकट हुए थे. महाशिवरात्रि भगवान शिव का प्रमुख पर्व है. इसलिए इस दिन श्रद्धा व विधिपूर्वक व्रत करने से अश्वमेघ यज्ञों का फ़ल प्राप्त होता है. इसके लिए यदि अपनी राशि के अनुसार पूजन करें तो निश्चय ही पूजन अधिक शुभ फ़लप्रदायी होता है.


मेष- 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का उच्चारण करते हुए भगवान शिव को फ़लों का रस चढ़ाना चाहिए, एवं सुर्ख लाल चन्दन का तिलक लगाना चाहिए.


वृष- भगवान शिव को कच्चा दूध तथा सफ़ेद आक के पुष्प अर्पित करते हुए 'ॐ मृत्युंजयाय नमः' मंत्र का उच्चारण करना चाहिए.


मिथुन- ‘ओमकाराय नमः ' मंत्र द्वारा भगवान शिव को हरी दूब के 11 तिनके चढ़ाना चाहिए तथा सुगन्धित इत्र (सुगन्धित तेल) लगाना चाहिए.


कर्क- भगवान शिव को सुगन्धित देशी घी तथा धतूरे के फ़ूल अर्पित करते हुए 'ॐ महाकालाय नमः' मंत्र का जाप करें.


सिंह- 'ॐ त्रयम्बकाय नमः' मंत्र का उच्चारण करते हुए मीठे गन्ने के रस द्वारा शिवलिंग का अभिषेक करें तथा 11 बिल्व पत्र अर्पित करें.


कन्या- 'ॐ उमापतयै नमः ' मंत्र का उच्चारण करते हुए शहद द्वारा भगवान शिव का अभिषेक करें तथा खेजड़ी के पत्ते अर्पित करें.


तुला- जल में चीनी मिलाकर गुलाब के पुष्प अर्पित करते हुए ' ॐ वृषभध्वजाय नमः ' मंत्र का जाप करें.


वृश्चिक- ' ॐ चन्द्रमौलिने नमः ' मंत्र द्वारा भगवान शिव का दही से अभिषेक करके अक्षत अर्पित करना चाहिए.


धनु- ' ॐ पिनाकपाणिने नम: ' मंत्र द्वारा जल में हल्दी मिलाकर भगवान शिव को चढ़ाना चाहिए तथा पीले पुष्प अर्पण करना चाहिए.


मकर- ' ॐ सद्योजाताया नमः ' मंत्र का उच्चारण करते हुए भांग मिले जल से भागवान शिव का अभिषेक करें तथा पिस्ते का बादाम अर्पित करें.


कुम्भ- ‘ॐ हरिहराय नमः ’ मंत्र द्वारा सफ़ेद, काले तिल मिश्रित जल भगवान पर चढ़ायें तथा गुढ़ व चने का प्रसाद अर्पित करें.


मीन- जल में गुलाबजल मिलाकर तथा कमल के पुष्प व बिल्वपत्र अर्पित करते हुए भगवान शिव का पूजन करें तथा ‘ॐ वैद्यनाथाय नमः ’ मंत्र का जाप करें.


शिव पूजन में कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए. जैसे-


माता गौरी के पूजन बिना शिव पूजन अधूरा माना जाता है. व्रतधारी हो सके तो रुद्राक्ष की माला धारण सात्विक आहार विचार तथा व्यवहार रखें. शिवलिंग पर चढाया हुआ प्रसाद ग्रहण नही करना चाहिए परन्तु सामने रखा गया प्रसाद लिया जा सकता है. शिवमंदिर की परिक्रमा कभी पूरी नही करनी चाहिए. परिक्रमा हमेशा आधी ही की जाती है। शिव पूजन में केवडा तथा चम्पा के फूलों का प्रयोग वर्जित बताया गया है.


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