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योग और कच्ची प्याज
 
Posted by: neerus
2012-02-11 02:42:58
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एक समय कोई योगाभ्यासी नाना साहेब चाँदोकर के साथ शिरड़ी आया. उसने पातंजलि योगसूत्र तथा योगशास्त्र के अन्य ग्रन्थों का विशेष अध्ययन किया था परन्तु वह व्यवहारिक अनुभव से वंचित था. मन एकाग्र न हो सकने के कारण वह थोड़े समय के लिये भी समाधि न लगा सकता था. यदि साई बाबा की कृपा प्राप्त हो जाये तो उनसे अधिक समय तक समाधि अवस्था प्राप्त करने की विधि ज्ञात हो जायेगी. इस विचार से वह शिरड़ी आया और हब मस्जिद पहुँचा तो साई बाबा को प्याज सहित रोटी खाते देख उसे विचार आया की यह कच्ची प्याज सहित सूखी रोटी खाने वाला व्यक्ति मेरी कठिनाईयों को किस प्रकार हल कर सकेगा? साई बाबा अन्तर्ज्ञान से उसका विचार जानकर तुरन्त नाना साहब से बोले कि, ''ओ नाना! जिसमे प्याज हजम करने की शक्ति है, उसको ही उसे खाना चाहिये अन्य को नही''
इन शब्दों से अत्यत्न विस्मित होकर योगी ने साई चरणों में पूर्ण आत्मसमर्पण कर दिया. शुद्ध और निष्कपट भाव से अपनी कठिनाईयाँ बाबा के समक्ष प्रस्तुत करके उनसे उनका हल प्राप्त किया और इस प्रकार संतुष्ट और सुखी होकर बाबा के दर्शन और उदी लेकर वह शिरड़ी से चला गया.
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