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News >>पहचाने शनि रत्न नीलम को
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पहचाने शनि रत्न नीलम को
 
Posted by: tniranjan
2010-12-16 06:06:51
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'' नीलम '' नीले रंग का बहुत ही मुलायम और खूबसूरत रत्न है. यह सभी रत्नों में सबसे खास महत्व रखता है.श्रीशनि देव का यह रत्न नीलम, संसार में सबसे श्रेष्ठ और चमत्कारिक रत्नों में माना गया है. इसे पहनने के बाद, यह जिसके लिए शुभ हो जाए उसे राजा और जिसे अशुभ हो जाए उसे रंक भी बना देता है.


नीलम नीला, लाल (सुर्ख लाल) सफ़ेद हरा, बैंगनी आसमानी पीला आदि रंगों में पाया जाता है. (पीला नीलम वृहस्पति से सम्बंधित है) कश्मीर में पाये जाने वाले नीलम को मयूर नीलम कहा जाता है. मोर की गर्दन जैसे रंग वाला यह नीलम उत्तम श्रेणी का माना जाता है। भारत के अलावा यह चीन अमेरिका थाईलैंड़, जावा, आस्ट्रेलिया, श्रीलंका और काबुल के पास भी पाया जाता है. कटैला, काला हकीक, काला स्टार, मार्का इसके उपरत्न होते हैं.


श्रेष्ठ नीलम के गुण -

- नीलम बहुत अधिक चिकना, चमकीला, साफ़ व पारदर्शी होता है. इसमे से छोटी - छोटी किरणें निकलती दिखाई देती हैं. यदि कोई तिनका असली नीलम के सम्पर्क में आता है तो तिनका उससे चिपट जाता है. असली नीलम में सीधी धारियाँ होती हैं.

- गाय के दूध में सच्चा नीलम ड़ाल दिया जाए तो दूध का रंग नीला हो जाता है.

- काँच के गिलास में पानी भरकर उसमें नीलम ड़ाल दिया जाए, तो पानी से नीले रंग की किरणें स्पष्ट निकलती हुई दिखाई देती है.

- नीलम को यदि धूप में रखा जाए तो इससे नीले रंग की तीव्र किरणें स्पष्ट निकलती हुई दिखाई देती हैं.

नीलम एक ऐसा चमत्कारिक रत्न माना जाता है जिसके बारे में कहा जाता है कि बिच्छु के ड़ंक पर नीलम रत्न के असर वाला पानी ड़ालने से जहर का प्रभाव कम होता रहता है.


कब और कैसे धारण करें –

नीलम को कभी भी शौक के तौर पर न पहनें. इससे बहुत जल्दी नकारात्मक प्रभाव भी पड़ता है. इस रत्न को धारण करते समय विशेष सावधानी बरतें.


- किसी योग्य ज्योतिषि को अपनी जन्मपत्री दिखाकर परामर्श लें. उसके बाद ही नीलम धारण करें.

- नीलम का वजन 4 रत्ती से कम का नही होना चाहिए. नीलम 5 या 7 रत्ती का पंचधातु, स्टील या चांदी की अंगूठी में जड़वाना चाहिए.

- शनिवार के दिन शुक्ल पक्ष में अपने अराध्यदेव के समक्ष बैठकर, अँगूठी को धूप दीप दिखाएँ. ‘ ॐ शं शनैश्चराय नमः ’ मंत्र का 10 बार जप करें. पूजा पाठ के बाद सूर्यास्त के दो घंटे पहले, दाहिने हाथ की मध्यमा उँगली में अँगूठी को धारण करें.


नीलम के साथ केवल पन्ना, हीरा और गोमेद ही धारण करना चाहिए.


जिन व्यक्तियों में नीलम या उपरत्न धारण करने का सामर्थ्य न हो वह लाजावर्त, नीला गार्नेट, नीला स्पाईनल आदि धारण कर सकते हैं.


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