जब भगवान शिव डर कर भागे
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2011-02-03 07:17:12
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' भगवान शिव शंकर ' करोड़ो सूर्य के समान दीप्तिमान हैं. जिनके ललाट पर चन्द्रमा शोभायमान है. नीले कण्ठ वाले, अभिष्ट वस्तुओं को देने वाले है. तीन नेत्रों वाले यह शिव, काल के भी काल महाकाल हैं. कमल के समान सुन्दर नयनों वाले अक्षमाला और त्रिशूल धारण करने वाले अक्षर - पुरुष हैं. यदि क्रोधित हो जाएं तो त्रिलोक को भस्म करने के शक्ति रखते हैं और यदि किसी पर दया कर दें तो त्रिलोक का स्वामी भी बना सकते हैं. यह भयावह भव सागर पार कराने वाले समर्थ प्रभु हैं. भोले नाथ बहुत ही सरल स्वभाव, र्स्वव्यापी और भक्तों से शीध्र ही प्रसन्न होने वाले देव हैं.
एक बार असुर राज भस्मासुर भोले शंकर की भक्ति करके उन्हें प्रसन्न कर लेता है और भोले नाथ माता पार्वती के साथ उसे दर्शन देते हैं. भस्मासुर को वरदान मांगने को कहते हैं. शिव के साथ माँ पार्वती को देखकर वह उन पर मोहित हो जाता है. लेकिन उनको कैसे मांगे ! यह विचार करके एक वरदान मांगता है कि - जिस किसी के सिर पर मैं हाथ रख दूँ वह तुरन्त भस्म हो जाये और भगवान शिव तो ठहरे ही निपट भोले. प्रसन्नता में बोल दिया - तथास्तु !
भोले शंकर तथास्तु कहकर जाने लगते हैं. उसी समय भस्मासुर उनके पीछे शिव पर हाथ रखकर भस्म करने आ जाता है. अब भोले नाथ की समझ में आ गया कि मेरा ही वरदान मुझ पर आजमाना चाहता है. भोलेनाथ अपने प्राण बचाने के लिए भागते हैं और एक गुफ़ा के अन्दर जाकर छुप जाते हैं. भस्मासुर गुफ़ा के द्वार पर बैठ भगवान शिव के बाहर निकलने की प्रतिक्षा करने लगता है. यह सब लीला भगवान नारायण देख रहे थे. भगवान विष्णु नारायण तुरन्त मोहिनी का रुप बना कर भस्मासुर को रिझाने आ जाते हैं. मोहिनी रुप धरे भगवान विष्णु भस्मासुर को रिझाने के लिए नाचने लगते हैं और भस्मासुर को भी नाचने को उकसाते हैं. भस्मासुर मोहिनी पर इतना मोहित होता है कि अपना सुध-बुध खो उनके साथ नाचने लगता है. मोहिनी नाच-नाच में अपना हाथ सिर पर रख नृत्य की मुद्रा बनाती है. उसे देख मग्न होकर भस्मासुर भी अपना हाथ अपने सिर पर रख लेता है और भस्म हो जाता है.
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