काशी को उजाड़ने की कोशिश
Posted by:
tniranjan
2011-07-09 07:01:32
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एक बार भगवान शिव ने सूर्यदेव को बताया कि काशीपुरी का राजा दिवोदास तथा उसकी प्रजा बहुत ही नेक तथा धार्मिक प्रवृति की है. इसलिये हम चाहकर भी उस धार्मिक नगरी को उजाड़ नही पा रहे. इसलिये तुम उस मंगलमयी काशीपुरी को जाओ और कुछ ऐसा उपाये करो कि राजा तथा प्रजा धर्म के विरुद्ध आचरण वाली हो जाये. जिससे काशी उजड़ जाये परन्तु उस राजा का अपमान मत करना क्योंकि धर्म आचरण में लगे हुये सत्पुरुष का जो अनादर किया जाता है वह अपने ही ऊपर पड़ता है और वैसा करने से महान पाप होता है. यदि तुम्हारे बुद्धि बल से राजा धर्मभ्रष्ट हो जाये तभी अपनी दुःसह किरणों से तुम नगर को उजाड़ देना. मैने बहुत से देवताओं और योगियों को काशी भेजकर देख लिया, वे सब मिलकर भी दिवोदास के धर्माचरण में कोई छिद्र न ढूंढ़ सके और असफ़ल होकर लौट आये. हे दिवाकर ! इस संसार में जितने जीव है, उन सबकी चेष्टाओं को तुम जानते हो. इसलिये लोकचक्षु कहलाते हो. अतः मेरे कार्य सिद्धि के लिये तुम शीध्र जाओ. मैं काशी को दिवोदास से खाली कराकर वहाँ निवास करना चाहता हूँ.
भगवान शिव की आज्ञा शिरोधार्य मानकर सूर्यदेव काशी गये. पूरी नगरी महल के अन्दर-बाहर सभी जगह घूम-घूम कर ढूंढते हुये भी उन्हें राजा में थोड़ा सा भी धर्म का व्यतिक्रम नही देखा. भगवान सूर्यदेव अनेक रुप धारण करके बहुत समय तक काशी में रहे. इस बीच उन्होंने अनेकों प्रकार के दृष्टान्तों और कथानकों द्वारा तथा अनेकों प्रकार के व्रत का उपदेश देकर काशी के नर-नारियों को बहकाने की कोशिश की, परन्तु वे किसी को भी धर्म मार्ग से डिगाने में सफ़ल नही हो पाये. इस प्रकार काशी में विचरते हुये सूर्य ने कभी किसी भी मनुष्य के धर्म आचरण में किसी भी प्रकार का खोट नही पाया.
भगवान सूर्यदेव प्रसन्न होकर मन ही मन बोले- दुर्लभ काशीपुरी को पाकर कौन सचेत पुरुष उसे छोड़ सकता है. इस संसार में प्रत्येक जन्म में स्त्री, पुत्र, धन मिल सकते हैं. केवल काशी पुरी नही मिल सकती. इस प्रकार काशी के धर्ममय प्रभाव को देखकर भगवान सूर्य का मन काशी में रहने के लिये लोल अर्थातत् चंचल हो उठा. इसलिये उनका काशी में लोलार्क नाम प्रसिद्ध हुआ. दक्षिण दिशा में असी संगम के समीप लोकार्क स्थित है. वे सदा काशी में रहकर, काशीनिवासियों के योग-क्षेम का वहन करते हैं. मार्गशीर्ष मास की सप्तमी या अष्टमी तिथि को रवियोग होने पर मनुष्य वहाँ की यात्रा तथा लोलार्क-सूर्य का दर्शन करके समस्त पापों से मुक्त हो जाता है. जो मनुष्य रविवार को लोलार्क सूर्य का दर्शन करता है. उसे भगवान सूर्य की कृपा की प्राप्ति होती है. यहाँ दर्शन करने मात्र से मनुष्यों के सभी दुख संताप स्वतः ही समाप्त हो जाते हैं.
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