ईश्वर तो कण - कण में बसा हुआ
Posted by:
Raneja
2012-02-20 12:51:45
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प्रसिद्ध विचारक जेवियर एक बार एक नाई की दुकान पर बाल कटवा रहे थे। बातों ही बातों में जेवियर और नाई के बीच इस बात पर बहस छिड़ गई कि ईश्वर है कि नहीं। नाई का कहना था कि अगर ईश्वर होता तो दुनिया में शांति और खुशी होती न कि हिंसा और बीमारियां। अगर वह होता तो दिखाई देता। लेकिन ईश्वर तो कहीं दिखता ही नहीं। दूसरी ओर जेवियर का तर्क था कि ईश्वर तो कण - कण में बसा हुआ है , बस उसे खोजने वाली नजर और साफ नीयत चाहिए।
बहस चलती रही और इस बीच नाई जेवियर के बाल भी काटता रहा। वहां मौजूद और लोग भी इस बहस का मजा ले रहे थे। लेकिन इसका कोई नतीजा नहीं निकला। बाल कटवा कर जेवियर दुकान के बाहर आ गए और सड़क पर इधर - उधर टहलने लगे। तभी उन्हें बढ़े बाल और खिचड़ी दाढ़ी वाला एक युवक नजर आया। वह उस युवक को पकड़ कर फिर उस नाई की दुकान पर चले गए। वहां उन्होंने नाई से कहा - लगता है शहर में एक भी ढंग का नाई नहीं बचा है। इस पर उस नाई ने कहा - क्या बात करते हैं। मैं इस शहर का सबसे बढ़िया नाई हूं। चारों ओर मेरे चर्चे होते हैं। इस पर जेवियर बोले - अगर ऐसा है तो इस नौजवान के बाल इतने बेढंगे क्यों हैं ? इस पर नाई तपाक से बोला - जब कोई मेरे पास आएगा तभी तो मैं उसके बाल काट पाऊंगा न। मैं खुद ही कैसे समझ जाऊंगा कि किसके बाल बढ़े हुए हैं इस पर जेवियर मुस्कराकर बोले - ठीक कह रहे हो। अभी कुछ देर पहले तुम कह रहे थे कि ईश्वर है ही नहीं। अरे भाई , कोई उसे खोजने जाएगा , उसका नाम लेगा , उसे पुकारेगा , उसे पाने की कोशिश करेगा तभी तो ईश्वर मिलेगा। बिना कोई कर्म किए ईश्वर थोड़े ही मिलेगा। नाई उनकी इस बात से सहमत हो गया।
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