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Posted by: Raneja Published on   2012-02-20 12:51:45 Views ,  2
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प्रसिद्ध विचारक जेवियर एक बार एक नाई की दुकान पर बाल कटवा रहे थे। बातों ही बातों में जेवियर और नाई के बीच इस बात पर बहस छिड़ गई कि ईश्वर है कि नहीं। नाई का कहना था कि अगर ईश्वर होता तो दुनिया में शांति और खुशी होती न कि हिंसा और बीमारि....
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Posted by:Tniranjan ; Published on   2012-02-17 04:50:47 ; Views   61
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महेश्वर शिव और आदिशक्ति भगवती सती के विवाहोपरान्त, कैलास पर आनन्दपूर्वक रहते हुये बहुत समय बीत गया. कुछ काल पश्चात् सम्पूर्ण प्रजापतियों ने यज्ञ किया. उस यज्ञ में सभी बड़े-बड़े देवता, ऋषि, महर्षि आदि पधारे. भगवान शिव के श्वसुर प्रजापति दक्ष भी वहाँ पर आये. सभी ने खड़े होकर राजा दक्ष का स्वागत किया. केवल ब्रह्मा और शिव एक देवता होने के कारण अपने स्थान से नही उठे. दक्....
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Posted by:Diwaker ; Published on   2012-02-16 06:36:01 ; Views   70
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वल्कल वस्त्र और मृगचर्म पहने हुये एक जटाधारी ब्राह्मण राजा सर्वमित्र के दरबार में पहुँचा में पहुँचा. हाथ में उसके एक सुरापात्र था. जाते ही वह वह बोला- ''ले लो, ले लो यह शराब ! जिसे लोक-परलोक की चिन्ता न हो, मौत का डर न हो, वह इसे ले सकता है''
राजा बड़ा शराबी था. खुद पीता था, दूसरों को भी पिलाता था. राज भर में अंधेर मचा था.
ब्राह्मण का यह वचन सुन और उसके चेहरे पर तेज देख राज....
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Posted by:Diwaker ; Published on   2012-02-14 02:51:54 ; Views   101
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दो ऋषि शौनक और अभिप्रतारी भोजन के लिये बैठे. भोजन करने से पहले जैसे ही भगवान को भोग लगाने लगे कि एक ब्रह्मणचारी ने भिक्षा के लिये आवाज लगाई.
ऋषि बोले- इस समय यहाँ भोजन नही मिलेगा. ब्रह्मचारी टला नही- उसने ऋषियों से पूछा. आप लोग किस देवता के उपासक हैं और किस देवता को भोग लगा रहें हैं?
ऋषि बोले- 'वायु देवता के, प्राण देवता के'.
ब्रह्मचारी- यह भोजन आपने किसके लिये बनाया ह....
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Posted by:Neerus ; Published on   2012-02-11 02:42:58 ; Views   94
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एक समय कोई योगाभ्यासी नाना साहेब चाँदोकर के साथ शिरड़ी आया. उसने पातंजलि योगसूत्र तथा योगशास्त्र के अन्य ग्रन्थों का विशेष अध्ययन किया था परन्तु वह व्यवहारिक अनुभव से वंचित था. मन एकाग्र न हो सकने के कारण वह थोड़े समय के लिये भी समाधि न लगा सकता था. यदि साई बाबा की कृपा प्राप्त हो जाये तो उनसे अधिक समय तक समाधि अवस्था प्राप्त करने की विधि ज्ञात हो जायेगी. इस विचार स....
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Posted by:Neerus ; Published on   2012-02-09 02:57:11 ; Views   135
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तरुण अवस्था में श्री साई बाबा ने अपने केश कभी नही कटाये और वे सदैव एक पहलवान की तरह रहते थे. जब वे रहाता जाते (जो की शिरड़ी से 3 मील दूर है) तो वह वहाँ से गेंदा, जाई और जूही के पौधे मोल ले जाया करते थे. वे उन्हें स्वच्छ करके उत्तम भूमि देखकर लगा देते थे और स्वयं सींचते थे. वामन तात्या नाम के एक भक्त इन्हें नित्य प्रति दो मिट्टी के घड़े दिया करते थे. इन घड़ों द्वारा बाबा स्व....
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Posted by:Swamini ; Published on   2012-02-08 03:51:51 ; Views   104
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कोसांबी में कपिल नाम का एक ब्राह्मण था. पिता उसका राजपुराहित था. वह मर गया तो बेटे के अनपढ़ होने से राजा ने दूसरे ब्राह्मण को राजपुरोहित बना दिया.
इस बात से कपिल की माँ बड़ी दुखी हुई. यह देख कपिल ने पढ़ने की इच्छा प्रकट की. वह श्रावस्ती में अपने पिता के एक मित्र के पास पढ़ने गया. शालीभद्र नाम के सेठ के यहाँ उसके भोजन का प्रबन्ध हो गया.
शालीभद्र की एक दासी थी. वह रोज ....
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